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मौलाना सैफ अब्बास के खिलाफ फ़र्ज़ी प्रोपोगंडा

हाल ही में यह देखने को मिला है के मौलाना मौसूफ़ के खिलाफ लोगो ने ज़बरदस्ती का प्रोपोगंडा किया!
•》यहाँ पर सवाल यह है के क्या मौलाना मौसूफ़ ने कोई आधिकारिक बयां दिया?
•》क्या उन्होंने किसी मिम्बर से अयातुल्ला ख़ामेनई की मुख़ालेफ़त की?
•》या उन्होने तहरीर की शक्ल में अयातुल्ला ख़ामेनई से इज़हारे मुख़ालेफ़त की?
•》क्या मौलाना सैफ अब्बास ने अहलेबैत के खिलाफ कोई जुमले इस्तेमाल किये?
•》क्या मौलाना सैफ ने अज़ादारी के खिलाफ कुछ कहा ?
एक फ़ोन कॉल को मुद्दा बना के पब्लिक ने उनके खिलाफ लिखना शुरू कर दिया और यह सिर्फ इस लिए हुआ के बुज़ुर्ग उलेमा ने इसका साथ दिया !! क्या बुज़ुर्ग उलेमा को नहीं मालूम के फ़ोन कॉल में की गयी बात एक पर्सनल बात होती है और इन बातो को निकलना ग़ीबत मे शुमार होता है और ग़ीबत गुनाह ए कबीरा में से है!!

अगर फ़ोन कॉल पर की गयी बात को मुद्दा बनाना है, तो फिर शहर ए लखनऊ के कई ऐसे बड़े बड़े उलेमा के नाम सामने आएंगे जिनपर बलात्कार के आरोप है जिनपर वक़्फ़ के सौदा करने का सबूत मौजूद है , है जिनपर लड़कीबाजी और सीटियाबाज़ी करने के गवाह मौजूद है, जिनपर ज़बरदस्ती घरो को खली करा के उनपर कब्ज़ा करने के आरोप है , जिनपर खानदानी प्रॉपर्टी ग़ज़ब करने के आरोप हैं!!
अब अगर दूसरी बात पे तवज्जो दी जाये के मौलाना सैफ अब्बास ने कहा क्या?
उन्होंने पाकिस्तान के जावद नक़वी के लिए शब्द इस्मेताल किये ! यह वही जावद नक़वी है जिसने हज़रात अली और बीबी फतेमाह ज़हरा के खिलाफ न ज़ेबा लफ्ज़ इस्तेमाल किये है यह वही जावद नक़वी है जिसने अयातुल्ला ख़ामेनई को हज़रात अली कहने की हिम्मत की और बीबी ज़हरा के लिए मुखसिराना जुमले इस्तेमाल किये ! यह वही जावद नक़वी है जिसने मरजईयत की शान में ग़ुस्ताख़ी की है और इन सब इल्ज़ामात के सबूत यूट्यूब और फेसबुक पे खुलम खुल्ला चल रहे है!!
मौलाना सैफ अब्बास नक़वी ने अयातुल्ला ख़ामेनई को रहबर (वाली ए फ़क़ीह ) मैंने से इंकार किया उसकी दलील खुद अयातुल्ला सिस्तानी के वकील बयां कर चुके है जिसमे यह साफ़ तौर पर कहा गया है के हर मरजा अपने मुख़ालिद के लिए वाली ए फ़क़ीह होता है यानि मौलाना सैफ अब्बास साहब के लिए वाली ए फ़क़ीह वह है जिनकी मौलाना मौसूफ़ तक़लीद करते हैं! या मौलाना कल्बे जावद के वाली ए फ़क़ीह वह है जिनकी मौलाना कल्बे जावद तक़लीद करते है!! तो इस बात का मुद्दा बना कर मौलाना सैफ अब्बास को बदनाम करने की साज़िश क्यों की जारही है???
मौलाना सैफ अब्बास साहब ने साफ़ तौर पर यह कहा के वह अयातुल्ला ख़ामेनई को इंटरनेशनल लेवल का पॉलिटिशियन मानते है लेकिन वाली ए फ़क़ीह नहीं मानते इसी बात पर उलेमा ए हिन्द ने और साथ साथ पब्लिक ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया जो की सारा सर ग़लत है!! चलिए एक दफा यह मान लिया जाये के पब्लिक में अक्सरियत जाहिल है( दीनी मामले में) लेकिन उलेमा ने ऐसी हरकत अंजाम दी इसका जवाब बरोज़ ए महशर इन उलेमा को देना होगा!!
क्या उलेमा को यह बात नहीं पता ?? यक़ीनन पता है !! तो फिर मौलाना मौसूफ़ को टारगेट क्यों बनने दिया गया?? क्या उलेमा ने ज़ाति फायदे के लिए मौलना मौसूफ़ को टारगेट बनाया??
मौलाना कल्बे जावद के इर्द गिर्द टहल रहे एक मौलवी जो बिहार (पटना) से ताल्लुक़ रखता है उसने और उसके खानदानी अफ़राद ने खुल्लम खुल्ला वक़्फ़ की ज़मीन बेचीं जिसके सबूत मौजूद है लेकिन उस मौलवी के खिलाफ कोई बयां नहीं दे रहा है क्या यह मौलाना सैफ अब्बास के ऊपर ज़ात्ति नहीं? ??
क्या मौलाना कल्बे जावद और मौलाना सैफ अब्बास के बीच चल रहे पुराने घरेलू इख़्तेलाफ़ का फायदा उठाया गया ?? मौलाना कल्बे जावद या फिर मौलना कल्बे सादिक़ ने इस प्रोपेगण्डे के खिलाफ कुछ नहीं बोला और नाही इसको रोकने के लिए सख्त क़दम उठाये क्या खानदानी दुश्मनी के लिए पब्लिक का सहारा लिया गया और पूरे मुद्दे को शरीयत का जमा पहना के पब्लिक के सामने पेश किया गया ??
मौलाना कल्बे जावद और मौलाना कल्बे सादिक़ ने अपना शरई फ़रीज़ा नहीं निभाया और ना ही मौलाना सैफ अब्बास से कोई गुफ्तगू की! जबकी शरीयत इस के बार खिलाफ है! यह गुनाह ए कबीरा जो समर रिज़वी नाम के शख्स ने किया उसको मुद्दा बना कर तमाम उलेमा ने मौलाना सैफ अब्बास के खिलाफ इस्तेमाल किया! कुछ उलेमा मस्लेहत के तहत खामोश भी रहे और कुछ उलेमा ने इस तहरीक में शिरकत नहीं की!!
जहा तक बात है समर रिज़वी की और उसके यह कहना के अज़ादारी ए इमाम ए हुसैन में वह नाच गण करेगा यह बात किसी भी मौलवी और क़ाएद को सुनाई नहीं दी ! सबने ईरान को खुश करने के लिए अयातुल्ला ख़ामेनई के ऊपर कही हुयी बात को मुद्दा बनाया लेकिन किसी भी अलीम और मौलवी ने समर रिज़वी की कही हुयी बात की मुख़ालेफ़त नहीं की...
इमाम हुसैन के ऊपर हो रहे सितम और उनकी आज़ादरी के खिलाफ बोले गए जुमलो पर किसी ने आवाज़ नहीं उठायी लेकिन एक खाकी बशर (अयातुल्ला ख़ामेनई) को वाली ए फ़क़ीह न माने पर इतना बड़ा प्रोपोगंडा कर दिया गया इस बात को साफ़ दर्शाता है के आज के मौलाना और मौलवी और क़ाएद अपने इमाम ए हक़ीक़ी की दिफ़ा मे कुछ नहीं बोले और अपने निजी फायदे के लिए और ईरान को खुश करने के लिए खड़े हो गए !! ठीक इसी तरह कूफ़े के मुंह बोले शिया जिन्होने जनाब ए मुस्लिम के वक़्त अपने इमाम ए हक़ीक़ी को पहचानने से इंकार कर दिया और हुकूमत की तरफदारी में जनाब ए मुस्लिम का साथ छोड़ गए!!

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